दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि, 18 जून। केदारघाटी के युवाओं के लिए आयोजित 15 दिवसीय नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह आज अगस्त्यमुनि में उत्साह और गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) एवं उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने क्षेत्र के युवाओं को प्रकृति, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का कार्य किया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ एवं बर्ड वॉचर श्री यशपाल नेगी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री अनुसूया प्रसाद एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री हरीश गुसाईं उपस्थित रहे। उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक श्रीमती पूनम चंद कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं और प्रतिभागियों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में श्रीमती पूनम चंद ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और सतत पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने आसपास के प्रकृति मार्गों, पक्षियों, वनस्पतियों और स्थानीय संस्कृति को पहचानकर उन्हें पर्यटन से जोड़ने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि श्री यशपाल नेगी ने प्रतिभागियों को पक्षी संरक्षण, प्रकृति अवलोकन और हिमालयी पारिस्थितिकी के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केदारघाटी में प्रकृति पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं और प्रशिक्षित युवा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकते हैं।
15 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को हिमालयी जैव विविधता, पक्षी पहचान, वनस्पति एवं वन्यजीव अध्ययन, प्रकृति व्याख्या कौशल, इको-टूरिज्म, सतत पर्यटन, प्राथमिक उपचार, संचार कौशल, पर्यटक प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को चोपता क्षेत्र के विभिन्न नेचर ट्रेल्स का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने प्रकृति अध्ययन, बर्ड वॉचिंग और फील्ड इंटरप्रिटेशन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन व्यापार मंडल अध्यक्ष श्री त्रिभुवन सिंह नेगी ने किया। इस अवसर पर समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा एवं सीमा शर्मा भी उपस्थित रहे।प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें अपने क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर को समझने, उसकी व्याख्या करने और उसे पर्यटन से जोड़ने का नया दृष्टिकोण प्रदान किया है।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक कौशल विकास पहल नहीं, बल्कि केदारघाटी के युवाओं को प्रकृति संरक्षण, स्वरोजगार और सतत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।











