दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। रुद्रप्रयाग जनपद के बसुकेदार क्षेत्र के छेनागाड़ में 28 अगस्त को बादल फटने और भीषण अतिवृष्टि से आई विनाशकारी आपदा को लगभग एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। इस प्राकृतिक त्रासदी में पूरा छेनागाड़ बाजार मलबे में तब्दील हो गया था। स्थानीय लोगों और नेपाली श्रमिकों सहित 9 लोग लापता हो गए थे, जबकि 12 से 15 दुकानें, वन विभाग की चौकी और अन्य बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया था। इसके अलावा कई सड़कें और गांवों के पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।
आपदा के एक वर्ष बाद भी तालजामण, जोला, डुंगर, भटवाड़ी, बड़ेथ और पाटियूं गांवों के हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं, जबकि कई जरूरी काम अब तक शुरू भी नहीं हो पाए हैं। तालजामण निवासी सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि गांव के संपर्क मार्ग आज भी नहीं बन पाए हैं। थपोनी, बगड़, रुडंला और कमद तोक में आज भी लोग टूटे और जोखिम भरे रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हैं। यहां सुरक्षा दीवार और बैरिकेडिंग का निर्माण भी नहीं हुआ है। वहीं बड़ेथ और डुंगर गांवों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। आपदा में जलापूर्ति लाइनें और टैंक क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके बाद से आज तक टैंकरों के सहारे पानी की आपूर्ति की जा रही है। आपदाप्रभावित भौंर गाँव जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं पहुंचे थे और गाँव के लिए सड़क निर्माण की घोषणा की थी आज भी परवान नहीं चढ़ी।
राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में देरी से नाराज स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने 2 मार्च को अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन भी किया था। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, संचार सुविधाओं और पुनर्वास कार्यों को शीघ्र पूरा करने की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से आश्वासन तो मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। ऐसे में अब एक बार फिर आपदा प्रभावित ग्रामीण आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। पूर्व प्रधान तालजामण शिवानंद नौटियाल का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त सड़कों का शीघ्र निर्माण डामरीकरण, चंदन गंगा नदी पर स्थायी पुल, छेनागाड़ बाजार का पुनर्निर्माण, मोबाइल और संचार सेवाओं की बहाली, बैंकिंग सुविधाओं की पुनर्स्थापना तथा आपदा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और उचित मुआवजा शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों, मरीजों और स्थानीय व्यापार पर आज भी आपदा का असर साफ दिखाई दे रहा है।
हालांकि सरकार ने आपदा के तुरंत बाद बसुकेदार-छेनागाड़-नागजगई सड़क को आवागमन के लिए दुरुस्त कर दिया था। आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया गया। इसके अलावा बगड़ क्षेत्र में इन दिनों सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे भविष्य में खतरे को कम करने की उम्मीद है।इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्व में घोषित लाभ अब तक उन्हें नहीं मिल पाया है। उनका आरोप है कि पुनर्वास और स्थायी पुनर्निर्माण के अधिकांश कार्य आज भी अधूरे हैं और प्रभावित गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आवासीय और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा दीवार नहीं लग पाई।
अब आपदा के एक वर्ष बाद फिर से प्रभावित ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं। उनका कहना है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।












