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मुनिमहाराज की प्रथम चरण की देवरा यात्रा संपन्न, एक माह बाद मूल मंदिर लौटे, भक्तों को दिया आशीर्वाद

दस्तक पहाड न्यूज।। मंदाकिनी घाटी के आराध्य भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज की पावन देवरा यात्रा पूर्ण श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के निर्वहन के साथ संपन्न हो गई। 14 जनवरी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर प्रारंभ हुई यह देवरा यात्रा आज 14 फरवरी को एक माह के भ्रमण के बाद अपने मूल मंदिर पहुंची।

नंगे पांव और निराहार व्रत के कठोर संकल्प के साथ संपन्न इस दिव्य यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। देवरा यात्रा के दौरान देवडोली घर-घर जाकर भक्तों की कुशलक्षेम पूछती रही और आशीर्वाद प्रदान करती रही, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। देवरा यात्रा का शुभारंभ भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज की चल विग्रह डोली के गर्भगृह से बाहर आने के साथ हुआ। यात्रा का प्रथम प्रवास मंदिर परिसर में, दूसरा नाकोट गांव और तीसरा धान्यूं गांव में हुआ। इसके पश्चात देवडोली विजयनगर, बनियाड़ी, सौड़ी, चमेली, रुमसी, डोभा, भौंसाल, चौण्ड और सौड़ भट्ट गांवों से होते हुए बावई गांव पहुंची, जहां भगवान मुनिमहाराज ने पांच दिनों तक भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान किया।

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बावई के बाद देवरा यात्रा मल्यागांव बोरा, मयकोटी, कुमोली होते हुए मालकोटी गांव पहुंची। मालकोटी गांव भगवान के हकहकूधारी थोकदार परिवारों का प्रमुख गांव माना जाता है, जहां देवडोली का भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात यात्रा कर्णधार, बमोली, दुगड्डा, बद्रीकोट, डांगी गांव, कोयलपुर और गुनाऊं गांव से होते हुए कुल पुरोहितों के गांव बेंजी गंगतल पहुंची। यहां से सिल्ली में रात्रि विश्राम के बाद देवडोली आज अपने मूल मंदिर लौटी। यात्रा के दौरान भगवान अगस्त्य मुनिमहाराज ने अगस्त्यमुनि मैदान स्थित अपने दयूके में जाकर पारंपरिक नृत्य भी किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

इस पावन यात्रा में मठाधीश पं. योगेश बेंजवाल, आचार्य भूपेंद्र बेंजवाल, सुनील बेंजवाल, हरि सिंह रावत, मनवर सिंह रावत और दलीप सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवडोली के साथ चलते रहे। मठाधीश पं. योगेश बेंजवाल ने बताया कि 15 वर्षों बाद 14 जनवरी को देवरा यात्रा पर निकली भगवान मुनिमहाराज की डोली आज एक माह बाद अपने मूल मंदिर लौटी है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी वर्ष पंचसिल्ला का देवरा आयोजित किया जाएगा।पूरी देवरा यात्रा श्रद्धा, त्याग और सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल बनकर क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का महापर्व सिद्ध हुई।

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रविवार, 28 जून 2026

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