दस्तक पहाड न्यूज केदारनाथ।। केदारनाथ धाम में दर्शन व्यवस्था, परंपरागत अधिकारों और हक़-हुक़ूक़ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज के पारंपरिक अधिकारों को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से जारी एक आदेश चर्चा का विषय बन गया है।
बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह की ओर से 28 मई 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार चारधाम यात्रा के दौरान श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था में आंशिक बदलाव किया गया है। आदेश में कहा गया है कि जिला प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा लिखित रूप से राज्य सरकार से प्राप्त प्रोटोकॉल सूचना के आधार पर ही प्रोटोकॉल पर्ची जारी की जाएगी और प्राथमिक सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए प्रति व्यक्ति ₹1100 की सहयोग राशि ली जाएगी।
आदेश के अनुसार यह व्यवस्था श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध दर्शन कराने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और विशेष श्रेणी के लोगों के लिए भी अलग व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।लेकिन इस फैसले के सामने आते ही केदारनाथ धाम से जुड़े तीर्थ पुरोहितों और हक़-हुक़ूक़धारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत वे अपने यजमानों को पूजा-अर्चना और दर्शन कराते आए हैं। ऐसे में नई व्यवस्था कहीं न कहीं उनके पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जब हाईकोर्ट स्वयं उनके पारंपरिक अधिकारों को मान्यता दे चुका है, तो मंदिर समिति को कोई भी नई व्यवस्था लागू करते समय हक़-हुक़ूक़धारियों और स्थानीय परंपराओं का भी ध्यान रखना चाहिए।वहीं सोशल मीडिया पर भी इस आदेश को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि बाबा केदार के दरबार में दर्शन व्यवस्था श्रद्धा और परंपरा के आधार पर चलेगी या शुल्क आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। कुछ लोगों का कहना है कि भीड़ प्रबंधन के लिए व्यवस्था जरूरी है, लेकिन धार्मिक परंपराओं और स्थानीय अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर मंदिर समिति का तर्क है कि लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या को देखते हुए धाम में व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रोटोकॉल दर्शन की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जा रहा है।फिलहाल ₹1100 वाली पर्ची को लेकर केदारनाथ धाम में धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बढ़ते विरोध के बीच बीकेटीसी इस व्यवस्था पर कायम रहती है या तीर्थ पुरोहितों और हक़-हुक़ूक़धारियों के साथ बातचीत कर कोई नया समाधान निकालती है।











