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आस्था, इतिहास और परंपराओं के अनूठे अनुभव लेकर सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा से लौटा उत्तराखण्ड का दल

रुद्रप्रयाग से 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी निभाई सक्रिय भागीदारी, जनप्रतिनिधियों ने बताया अविस्मरणीय अनुभव

रुद्रप्रयाग टीम

दस्तक पहाड न्यूज रुद्रप्रयाग।। देवभूमि उत्तराखण्ड से गुजरात स्थित सोमनाथ धाम तक आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा’ सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं का दल आस्था, इतिहास और भारतीय संस्कृति की अविस्मरणीय स्मृतियां लेकर लौट आया। इस छह दिवसीय यात्रा में उत्तराखण्ड के सभी 13 जनपदों से 700 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यात्रा में गायत्री परिवार, सांस्कृतिक दल, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, संत-महात्मा और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

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संस्कृति विभाग उत्तराखंड टीम

यात्रा के दौरान श्रद्धालु उत्तराखण्ड की पवित्र नदियों का जल कलश लेकर सोमनाथ पहुंचे, जहां भगवान सोमनाथ का जलाभिषेक किया गया। इसके अलावा यात्रियों ने बाणगंगा तीर्थ, भलका तीर्थ, राम मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, सोमनाथ संग्रहालय, समुद्र तट, स्थानीय हाट बाजार तथा हिरणी, कपिला और सरस्वती नदियों के त्रिवेणी संगम पर आयोजित दिव्य आरती में भी सहभागिता की। यह यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर आयोजित की गई, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना, अटूट आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। यह आयोजन वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम दर्ज आक्रमण के 1000 वर्ष तथा स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 जुलाई को हर्रावाला रेलवे स्टेशन से विशेष रेलयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उन्होंने कहा था कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है।गुजरात सरकार के आत्मीय आतिथ्य एवं सुव्यवस्थित प्रबंधन की यात्रियों ने मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की यात्राएं केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता, पर्यटन संवर्धन तथा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम हैं। उत्तराखण्ड से चले इसदल में संस्कृति विभाग पौड़ी से अनिल बिष्ट के साथ उत्तराखण्ड का सांस्कृतिक दल भी शामिल हुआ। रुद्रप्रयाग जनपद से इस यात्रा में 40 सदस्यीय दल ने भाग लिया। दल में नोडल अधिकारी अंकित कण्डारी, यात्रा संरक्षक एवं लोकपाल डॉ. सी.पी. चमोली सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल रहे। रुद्रप्रयाग से जिलापंचायत सदस्य सारी वार्ड जयवर्धन कांडपाल ने कहा कि “सोमनाथ यात्रा केवल एक तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान को करीब से महसूस करने का अवसर रही। भगवान सोमनाथ के दर्शन और उत्तराखण्ड की पवित्र नदियों के जल से जलाभिषेक करना जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है।” वहीं जिलापंचायत सदस्य सतेरा वार्ड गम्भीर बिष्ट ने कहा कि “इस यात्रा ने हमें भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक शक्ति से और अधिक जोड़ा है। सोमनाथ धाम की भव्यता, ऐतिहासिक महत्व और वहां का आध्यात्मिक वातावरण हर श्रद्धालु के लिए प्रेरणादायी है। ऐसी यात्राएं समाज में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को मजबूत करती हैं।”

केदारनाथ विधायक श्रीमती आशा नौटियाल ने सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा से सकुशल लौटे उत्तराखण्ड के सभी श्रद्धालुओं का स्वागत एवं बधाई देते हुए कहा “यह यात्रा हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकता का प्रेरणादायी प्रतीक है। मैं इस सफल आयोजन के लिए केन्द्र सरकार, उत्तराखण्ड सरकार एवं गुजरात सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ। साथ ही यात्रा को सफल बनाने वाले सभी आयोजकों, अधिकारियों और सहयोगियों का भी धन्यवाद करती हूँ। भगवान श्री केदारनाथ एवं प्रभु सोमनाथ की कृपा सभी श्रद्धालुओं पर बनी रहे।”

यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने इसे जीवन की यादगार आध्यात्मिक यात्रा बताते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड और सौराष्ट्र स्थित सोमनाथ धाम का यह आध्यात्मिक संगम सदैव उनकी स्मृतियों में रहेगा।

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