किराए के भवन से शुरू हुआ संस्थान, अपना भवन न मिलने पर रुद्रप्रयाग हुआ शिफ्ट; नागरिक मंच ने बंद पड़े विद्यालय भवन में आईटीआई शुरू करने का दिया था प्रस्ताव
दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। एक ओर देश में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, वहीं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद स्थित अगस्त्यमुनि का राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) वर्षों से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्ष 2011-12 में स्वीकृत यह आईटीआई किराए के भवन से शुरू हुआ, लेकिन स्थायी भवन का निर्माण न होने और बाद में किराए का भवन खाली होने के कारण वर्ष 2019 में इसे रुद्रप्रयाग आईटीआई में शिफ्ट कर दिया गया। तब से अगस्त्यमुनि का आईटीआई अपने मूल स्थान पर संचालित नहीं हो पा रहा है। अब स्थानीय नागरिक मंच ने अगस्त्यमुनि के बेड़ूबगड़ तथा विजयनगर वार्ड स्थित बंद पड़े राजकीय प्राथमिक विद्यालय धान्यू के भवनों में आईटीआई का पुनः संचालन शुरू करने का प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष रखा है।
नागरिक मंच के अध्यक्ष हरीश गुसाईं ने बताया कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने वर्ष 2011-12 में अगस्त्यमुनि में आईटीआई खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद वार्ड-7 के सिल्ली तोक स्थित एक किराए के भवन में संस्थान का संचालन शुरू किया गया। वर्ष 2019 में भवन स्वामी द्वारा भवन वापस लेने के बाद आईटीआई को रुद्रप्रयाग स्थानांतरित कर दिया गया, जहां वर्तमान में इसका संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि बेड़ूबगड़ तथा विजयनगर वार्ड में छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद पड़े राजकीय प्राथमिक विद्यालयों के भवन आईटीआई संचालन के लिए उपयुक्त हैं। यदि इनमें से किसी भवन में आईटीआई दोबारा शुरू किया जाता है तो अगस्त्यमुनि और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए दूसरे शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। नागरिक मंच ने यह भी सुझाव दिया है कि आईटीआई के विकास एवं संचालन में क्षेत्र में कार्यरत रिन्यू पावर प्रा. लि. की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के तहत सहयोग लिया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात तो करती है, लेकिन अगस्त्यमुनि जैसे क्षेत्रों में पहले से स्वीकृत संस्थानों के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई। उनका मानना है कि यदि आईटीआई को पुनः अगस्त्यमुनि में शुरू किया जाता है तो इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा का लाभ मिलेगा और पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।











