दस्तक पहाड न्यूज ऊखीमठ। मदमहेश्वर घाटी की धार्मिक, आध्यात्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत को शब्दों में संजोने वाली पुस्तक ‘भगवती राकेश्वरी महात्म्य’ का भव्य विमोचन आगामी 4 अक्टूबर को ब्लॉक सभागार ऊखीमठ में किया जाएगा। इसी अवसर पर पंच केदार दर्शन वार्षिक सम्मान समारोह का भी आयोजन होगा। कार्यक्रम को लेकर मदमहेश्वर घाटी में उत्साह का माहौल है। पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार लक्ष्मण सिंह नेगी हैं, जबकि इसका प्रकाशन संस्कृति प्रकाशन, अगस्त्यमुनि द्वारा किया गया है। विमोचन समारोह में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्र पंचायत प्रमुख पंकज शुक्ला करेंगे।
समारोह में राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट, ऐश्वर्या रावत, विजय कप्रवाण, पूर्व विधायक मनोज रावत, नगर पंचायत अध्यक्ष ऊखीमठ कुब्जा धर्म्वाण, नगर पंचायत अध्यक्ष अगस्त्यमुनि राजेंद्र प्रसाद गोस्वामी, ज्येष्ठ प्रमुख राकेश नेगी, कनिष्ठ प्रमुख प्रदीप त्रिवेदी, दीक्षा प्रॉपर्टी चेयरमैन कुलदीप रावत, सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ भट्ट सहित पत्रकार, साहित्यकार और संगीतकार मौजूद रहेंगे।
राकेश्वरी की महिमा और लोक परंपराओं का दस्तावेज
मां चंद्रकल्याणी भगवती राकेश्वरी आठ गांव जूला मंदिर समिति के अध्यक्ष मदन भट्ट ने बताया कि लेखक लक्ष्मण सिंह नेगी ने पुस्तक के माध्यम से भगवती राकेश्वरी की महिमा, पौराणिक मान्यताओं, दिवारा यात्रा की परंपरा तथा मदमहेश्वर घाटी की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संकलित करने का प्रयास किया है।पुस्तक में भगवती राकेश्वरी, मदमहेश्वर, वृद्ध मदमहेश्वर, मनणामाई तीर्थ और सिद्धपीठ कालीशिला सहित क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और लोक परंपराओं को स्थान दिया गया है।
मातृशक्ति को किया जाएगा सम्मानित: कार्यक्रम संयोजकों ने बताया कि समारोह के दौरान धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली मातृशक्ति को पंच केदार दर्शन वार्षिक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।इस अवसर पर केदार घाटी की प्रख्यात कथावाचक राधिका जोशी ‘केदारखण्डी’, गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर की प्रोफेसर कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ सहित केदार-बद्री मानव श्रम समिति और ‘मंदाकिनी की आवाज’ से जुड़ी मातृशक्ति को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि हिमालयी समाज में महिलाओं ने लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।











