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Dastak Pahad Team

पांच माह से वेतन को तरसे अगस्त्यमुनि में ट्रॉली कर्मचारी, आखिर कब जागेगा प्रशासन ?

दस्तक पहाड़ न्यूज | अगस्त्यमुनि ll मंदाकिनी नदी पर बनी अगस्त्यमुनि-चक गदनू ट्रॉली एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला ट्रॉली संचालन में लगे कर्मचारियों के पांच माह से लंबित वेतन का है। रोज सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार ड्यूटी करने वाले कर्मचारी आज अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए परेशान हैं।
यह ट्रॉली मंदाकिनी नदी के आर-पार बसे दर्जनों गांवों के लोगों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। खासकर स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और ग्रामीण रोज इसी ट्रॉली के सहारे आवाजाही करते हैं। केदारनाथ आपदा के बाद जब क्षेत्र की सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई थी, तब वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इस ट्रॉली का संचालन शुरू किया गया था। आज भी चक गदनू क्षेत्र के कई गांवों के लोगों की दैनिक आवाजाही इसी पर निर्भर है।
ट्रॉली संचालन में लगे कर्मचारी अस्थाई रूप से नियुक्त किए गए हैं, लेकिन बावजूद इसके उन्हें लंबे समय से नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले पांच महीनों से उन्हें तनख्वाह नहीं दी गई, जबकि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सुबह से शाम तक ट्रॉली संचालन कर लोगों को सुरक्षित आर-पार पहुंचाने वाले ये कर्मचारी अब खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय जिम्मेदारों से वेतन जारी करने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन न देना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि श्रम कानूनों की अनदेखी भी माना जा रहा है।
गौरतलब है कि ट्रॉली सेवा पहले भी कई बार तकनीकी खराबी और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रही है। लेकिन इस बार कर्मचारियों के वेतन का मामला सामने आने से व्यवस्था की संवेदनहीनता उजागर हो गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोगों की जिंदगी सुरक्षित करने वाले इन कर्मचारियों की जिंदगी की चिंता कौन करेगा? और प्रशासन कब उनकी पांच माह की लंबित तनख्वाह जारी करेगा?

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शनिवार, 10 अक्तूबर 2026

आज का सुविचार

सच्चा ज्ञान केवल किताबों में नहीं, बल्कि अनुभव और आत्म-चिंतन में छिपा है। दूसरों की गलतियों से सीखें, अपनी गलतियों को स्वीकारें और निरंतर सुधार की प्रक्रिया में बने रहें, यही बुद्धिमानी है।

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