पहाड़ के युवाओं की मुहिम: लोकल संसाधनों से तैयार कर रहे पारंपरिक भैला, संस्कृति संरक्षण का दे रहे संदेश
दीपक बेंजवाल / दस्तक पहाड न्यूज।। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही पहाड़ों में पारंपरिक बग्वाल की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। आधुनिकता की दौड़ में कहीं न कहीं पहाड़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराएं पीछे छूटती जा रही हैं। ऐसे में रुद्रप्रयाग जनपद के कुछ युवा अपनी संस्कृति और विरासत को बचाने के लिए अनूठी पहल कर रहे हैं।युवा स्थानीय संसाधनों से पारंपरिक भैला तैयार कर रहे हैं, ताकि लोग अपनी पुरानी परंपराओं के अनुरूप पहाड़ी दीपावली यानी बग्वाल का आनंद ले सकें। उनका उद्देश्य केवल भैला उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ना भी है।
इस मुहिम को चला रही अगस्त्यमुनि ब्लॉक के दुगड्डा गाँव की उत्साही युुवा वन्दना भट्ट और विनीत बताते है कि पहाड़ में बग्वाल के दौरान भैला घुमाने की परंपरा का विशेष महत्व रहा है। पारंपरिक रूप से प्राकृतिक सामग्री से तैयार भैला जलाकर लोग सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं। यह परंपरा पहाड़ की लोक आस्था, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है। हमारे साथी युवाओं की इस पहल से स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा मिलने के साथ ही पारंपरिक उत्पादों को भी पहचान मिल रही है। वन्दना बताती है कि बीते साल भी उनकी इस मुहिम को लोगों का अच्छा समर्थन मिला था। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इगास बग्वाल में भी उनके भैलों को सराहा गया था। हमारा प्रयास है कि लोग आधुनिक पटाखों और आतिशबाजी के बजाय अपनी पारंपरिक बग्वाल को प्राथमिकता दें। हालांकि, भैला जलाते समय सुरक्षित स्थान का चयन और आग से बचाव के जरूरी इंतजाम करना भी बेहद जरूरी है।
रुद्रप्रयाग के लोगों के लिए खुशखबरी
अगर आप भी इस दीपावली पर पहाड़ की पारंपरिक बग्वाल का आनंद लेना चाहते हैं और आपको भैला चाहिए तो स्थानीय युवाओं से संपर्क कर सकते हैं।
संपर्क करें: अमित, मोबाइल नंबर: 93272 97745
आइए, इस दीपावली अपनी परंपराओं को फिर से जीवंत करें। लोकल को अपनाएं, पहाड़ की संस्कृति बचाएं और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी विरासत पहुंचाएं।
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रुद्रप्रयाग में पहाड़ी संस्कृति को








