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Dastak Pahad Team

मुख्यमंत्रियों ने कालीमठ में टेका मत्था, सुविधाओं के नाम पर अब भी खाली हाथ श्रद्धालु ! बदहाल इंतजामों पर फूटा पंचगाईं का गुस्सा

दस्तक पहाड न्यूज कालीमठ।। प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर में देश-प्रदेश के कई मुख्यमंत्री और विशिष्ट हस्तियां आस्था के साथ मत्था टेक चुकी हैं, लेकिन मंदिर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है। सड़क, शौचालय, श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था और मंदिर तक सुगम रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यह आरोप कालीमठ मंदिर समूह से जुड़े पंचगाईं क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने लगाया है।कालीमठ पंचगाईं समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र कालीमठ को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।इसी को लेकर कालीमठ पंचगाईं समिति ने अपने पारंपरिक हक-हकूकों और मंदिर व्यवस्थाओं में प्रभावी भागीदारी की मांग बुलंद की है। समिति ने बीकेटीसी के सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण के माध्यम से 12 सूत्रीय मांगपत्र भेजकर कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र को बीकेटीसी में स्थायी प्रतिनिधित्व देने, मंदिरों से जुड़े नीतिगत निर्णयों में सहभागिता सुनिश्चित करने तथा सदियों पुराने पारंपरिक अधिकारों को संरक्षित करने की मांग की है।

बीकेटीसी में स्थायी सदस्य की मांग: समिति अध्यक्ष लखपत राणा ने कहा कि पंचगाईं के हक-हकूकधारी सदियों से कालीमठ, कालीशिला और संबद्ध मंदिरों की सेवा, संरक्षण और धार्मिक व्यवस्थाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका और अधिकारों की अनदेखी उचित नहीं है। समिति ने कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र से बीकेटीसी में एक सदस्य का स्थायी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा मंदिरों से संबंधित नीतिगत निर्णयों, कार्यकारिणी एवं उपसमितियों की बैठकों में पंचगाईं समिति को उचित प्रतिनिधित्व देने तथा महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले समिति से औपचारिक परामर्श की व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है।

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मंदिर परिसर में कार्यालय की मांग: मांगपत्र में कालीमठ मंदिर परिसर में पंचगाईं समिति के सुचारू संचालन के लिए बीकेटीसी की ओर से कार्यालय कक्ष उपलब्ध कराने तथा धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में समिति के पदाधिकारियों की आधिकारिक सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समिति ने कालीमठ, कालीशिला, ऊखीमठ, जोशीमठ और बदरीनाथ समेत बीकेटीसी के अधीन मंदिरों में होने वाले वार्षिक एवं मौसमी उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों में पंचगाईं की पारंपरिक भूमिका को मान्यता देने की मांग की है। साथ ही ऐतिहासिक दस्तावेजों, समझौतों और अभिलेखों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है।

चार साल में निकलती है मां कालीमाई की देवरा यात्रा: मांगों में मां कालीमाई की दिव्य देवरा यात्रा को भव्य स्वरूप देने की मांग प्रमुख है। समिति के अनुसार करीब चार वर्ष के अंतराल में आयोजित होने वाली यह यात्रा पंचगाईं क्षेत्र की सदियों पुरानी सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा है।समिति ने यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार से प्रतिवर्ष बजट प्रावधान करने की मांग की है, ताकि यात्रा के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सकें। समिति ने वर्ष 2026 में श्री केदारनाथ धाम और वर्ष 2027 में श्री बदरीनाथ धाम में प्रस्तावित मां कालीमाई की देवरा यात्रा के दौरान विशेष स्वागत और उचित प्रोटोकॉल की भी मांग की है। समिति का कहना है कि यह महज धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्री केदारनाथ की अधिष्ठात्री शक्ति मां काली से जुड़ी सदियों पुरानी दिव्य परंपरा है। इसलिए यात्रा को उसी अनुरूप सम्मान और प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

रोजगार और व्यवसाय में प्राथमिकता की मांग: समिति ने बीकेटीसी के अधीन मंदिरों में कालीमठ पंचगाईं क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को दर्शन, रोजगार और व्यवसाय के अवसरों में प्राथमिकता देने की मांग की है। इसके साथ ही मंदिर में ड्यूटी, धार्मिक दायित्व अथवा अन्य जिम्मेदारी का निर्वहन करते समय किसी हक-हकूकधारी की मृत्यु या दुर्घटना होने पर संबंधित व्यक्ति अथवा उसके परिवार को उचित क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान करने की मांग भी उठाई गई है।

आंदोलन नहीं, संवाद से समाधान की उम्मीद: कालीमठ पंचगाईं समिति ने स्पष्ट किया कि हक-हकूकधारियों के पारंपरिक अधिकार केवल किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत हैं। इन अधिकारों के संरक्षण के साथ बीकेटीसी और पंचगाईं समिति के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।समिति ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए पंचगाईं प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक बुलाने की अपील की है। समिति पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार और बीकेटीसी आपसी संवाद, सम्मान और समन्वय के साथ समस्याओं का समाधान करेंगे, ताकि पंचगाईं जनता को अपने अधिकारों के लिए आंदोलन, धरना या प्रदर्शन का रास्ता न अपनाना पड़े।

 

बुधवार, 07 अक्तूबर 2026

आज का सुविचार

प्रशंसा से पिघलना मत और आलोचना से उबलना मत। निंदा उसी की होती है जो जिन्दा है, मरी हुई चीजों की तो अक्सर सिर्फ तारीफ ही होती है। सही समालोचना को स्वीकारें और आगे बढ़ें।

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