दस्तक पहाड न्यूज ऊखीमठ। भगवान श्री ओंकारेश्वर की पावन नगरी ऊखीमठ के मुख्य बाजार में कथित तौर पर बासी, गंदा और कीड़े लगा मांस बेचे जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। खाद्य सुरक्षा और आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले को लेकर नगर उद्योग व्यापार मंडल ऊखीमठ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापार मंडल ने इसे लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ बताते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष राजीव भट्ट के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि ऊखीमठ केवल एक सामान्य कस्बा नहीं, बल्कि भगवान श्री ओंकारेश्वर जी का पौराणिक धार्मिक स्थल होने के साथ ही बाबा केदारनाथ और बाबा मध्यमहेश्वर जी का शीतकालीन गद्दीस्थल भी है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के मुख्य बाजार में यदि खुलेआम दूषित और कीड़े लगा मांस बेचा जा रहा है तो यह न केवल स्थानीय लोगों और बाजार में आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करने वाला मामला है। व्यापार मंडल ने आरोप लगाया कि इस संबंध में पूर्व में भी संबंधित विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह है कि कथित तौर पर दूषित मांस की बिक्री का मामला एक बार फिर सामने आया है। व्यापार मंडल ने सवाल उठाया कि आखिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है? क्या किसी बड़ी बीमारी या जनस्वास्थ्य से जुड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि ऊखीमठ बाजार की सभी मीट-मांस की दुकानों का तत्काल निरीक्षण किया जाए। अवैध रूप से संचालित दुकानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो और दूषित मांस बेचने के आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले दुकानदार की दुकान तत्काल सीज की जाए। इसके साथ ही सभी दुकानों में स्वच्छता, उचित भंडारण और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य कराया जाए।
व्यापार मंडल ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभाग और व्यापार मंडल की संयुक्त निरीक्षण टीम गठित करने की भी मांग उठाई है, ताकि बाजार में समय-समय पर जांच हो सके और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।व्यापार मंडल ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो जनहित में व्यापार मंडल स्वयं ऐसी दुकानों को बंद कराने के लिए मजबूर होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।अब बड़ा सवाल यह है कि धार्मिक नगरी ऊखीमठ के मुख्य बाजार में खाद्य सुरक्षा से जुड़े इतने गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन कब जागेगा? क्या जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई करेगा या फिर शिकायतें और ज्ञापन सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगे?









