दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। रुद्रप्रयाग जनपद के जिस प्रस्तावित स्टेडियम को लेकर आज अगस्त्यमुनि में विरोध और सवाल खड़े हो रहे हैं, उसी खेल व्यवस्था की जरूरत को रुद्रप्रयाग की बेटी रोशनी कालूडा की राष्ट्रीय उपलब्धि कहीं अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखती है। अगस्त्यमुनि की खेल धरती से निकली इस बेटी ने राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड का मान बढ़ाकर साबित किया है कि खेल मैदान, प्रशिक्षण और छात्रावास केवल भवन या सुविधाएं नहीं, बल्कि पहाड़ की बेटियों के सपनों को उड़ान देने का माध्यम हैं। ऐसे समय में जब निर्माणाधीन स्टेडियम को लेकर सहमति नहीं बन पाने की स्थिति के बीच ऐथलेटिक्स बालिका छात्रावास के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं, रोशनी की उपलब्धि कई महत्वपूर्ण सवालों की ओर इशारा करती है। जिस व्यवस्था से निकलकर एक बेटी राष्ट्रीय स्तर पर दो पदक जीत सकती है, क्या ऐसी खेल व्यवस्था को समाप्त करने या कमजोर करने के बजाय उसे और मजबूत किए जाने की जरूरत नहीं है?
41वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 का आयोजन चेन्नई, तमिलनाडु में किया गया। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एथलेटिक्स बालिका छात्रावास अगस्त्यमुनि की पूर्व छात्रा कुमारी रोशनी कालूडा ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया और दो पदक अपने नाम किए। रोशनी कालूडा ने अंडर-20 बालिकाओं की 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया, जबकि 3 किलोमीटर स्टीपलचेस में कांस्य पदक प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि से जनपद रुद्रप्रयाग ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर है।
रोशनी के पदक बता रहे हैं—अगस्त्यमुनि में प्रतिभा की कमी नहीं
रोशनी की सफलता ऐसे समय में सामने आई है, जब अगस्त्यमुनि में निर्माणाधीन स्टेडियम को लेकर विरोध के चलते खेल व्यवस्था और विशेष रूप से ऐथलेटिक्स बालिका छात्रावास के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।रोशनी के दो राष्ट्रीय पदक यह बताने के लिए काफी हैं कि अगस्त्यमुनि में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो इन प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं, उचित मैदान और सुरक्षित एवं स्थायी खेल वातावरण उपलब्ध कराने की। सवाल यह भी है कि जब इसी व्यवस्था से निकलकर पहाड़ की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं, तो उनके भविष्य को और मजबूत करने के बजाय व्यवस्था के अस्तित्व पर ही सवाल क्यों खड़े होने चाहिए?
सहमति नहीं बन रही तो जनपद में दूसरे विकल्पों पर भी हो सकता है विचार
अगस्त्यमुनि में स्टेडियम निर्माण को लेकर यदि स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बन पा रही है, तो इस महत्वपूर्ण खेल परियोजना को रुद्रप्रयाग जनपद के किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर शिफ्ट करने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उद्देश्य किसी एक स्थान विशेष तक सीमित न होकर जनपद में मजबूत और स्थायी खेल आधारभूत ढांचा तैयार करना होना चाहिए।इसके लिए अगस्त्यमुनि के प्रस्तावित स्टेडियम स्थल से लगे ओतखोण्डला का भरान एवं विस्तार कर वहां स्टेडियम विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अगस्त्यमुनि के नजदीक चंद्रपुरी क्षेत्र के स्यालसौड़, बसुकेदार क्षेत्र में बड़ेथ का गुबला मैदान, लुकुंदरी धार, थाती दिगधार में प्रस्तावित सैनिक स्कूल के आसपास, तथा जागतोली मिनी स्टेडियम जैसे स्थानों को भी संभावित विकल्पों के रूप में देखा जा सकता है।इन स्थानों की भूमि उपलब्धता, पहुंच, यातायात, भौगोलिक स्थिति, भविष्य के विस्तार की संभावना और खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं के लिहाज से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जा सकती है। इससे विवाद की स्थिति से निकलकर जिले के लिए एक दीर्घकालिक खेल नीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।
खेल के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बन सकता है केंद्र
इन संभावित स्थलों पर केवल स्टेडियम ही नहीं, बल्कि आवश्यकता और भूमि की उपलब्धता के अनुसार अस्पताल एवं अन्य जनोपयोगी संस्थानों के निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इससे एक ही क्षेत्र में खेल, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास संभव होगा तथा दूरस्थ क्षेत्रों की जनता को भी लाभ मिल सकता है। ऐसा होने पर रुद्रप्रयाग जनपद में एक से अधिक स्थानों पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना बनेगी और स्थानीय युवाओं तथा बालिका खिलाड़ियों को अपने आसपास ही प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के अवसर मिल सकेंगे।
सीमित संसाधनों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर चमकी रोशनी : अगस्त्यमुनि स्थित ऐथलेटिक्स बालिका छात्रावास से प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची रोशनी की उपलब्धि छात्रावास से जुड़े प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के लिए भी गौरव का विषय है। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां की खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं, जो रुद्रप्रयाग की खेल प्रतिभाओं की क्षमता को दर्शाता है।रोशनी की सफलता यह संदेश देती है कि यदि पहाड़ की बेटियों को सही अवसर और सुविधाएं मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकती हैं।
जिला क्रीड़ा अधिकारी ने दी शुभकामनाएं : जिला क्रीड़ा अधिकारी मनोज सिंह चौहान ने रोशनी कालूडा की उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रोशनी की यह सफलता अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। खेल विभाग अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग एवं उत्तराखंड खेल फेडरेशन की ओर से भी रोशनी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई है।
अब सवाल सिर्फ स्टेडियम का नहीं, खिलाड़ियों के भविष्य का भी : रोशनी की उपलब्धि ने अगस्त्यमुनि में चल रही स्टेडियम से जुड़ी बहस को एक नया संदर्भ दे दिया है। मुद्दा अब केवल निर्माणाधीन स्टेडियम का विरोध या समर्थन नहीं, बल्कि अगस्त्यमुनि की खेल प्रतिभाओं और विशेषकर बालिका खिलाड़ियों के भविष्य का भी है। एक ओर अगस्त्यमुनि की बेटी 5000 मीटर में रजत और 3 किलोमीटर स्टीपलचेस में कांस्य जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है, वहीं दूसरी ओर उसी खेल व्यवस्था के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।ऐसे में जरूरत इस बात की है कि विवाद को टकराव का विषय बनाने के बजाय खिलाड़ियों के हित को केंद्र में रखकर समाधान खोजा जाए। यदि अगस्त्यमुनि में सहमति बनती है तो वहीं बेहतर खेल परिसर विकसित हो, और यदि सहमति नहीं बनती तो जनपद में उपलब्ध अन्य उपयुक्त विकल्पों का निष्पक्ष सर्वे कराकर जहां बेहतर संभावनाएं हों, वहां स्टेडियम विकसित किया जाए। रोशनी के ये दो पदक सिर्फ दो मेडल नहीं हैं। ये अगस्त्यमुनि की खेल प्रतिभाओं की क्षमता का प्रमाण भी हैं और व्यवस्था के सामने एक सवाल भी—क्या हम इन बेटियों के लिए खेल का मजबूत भविष्य तैयार करेंगे?


जिस खेल मैदान पर उठ








