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पंच पंडा समिति रुद्रपुर को बड़ी कानूनी जीत, केदारनाथ में परंपरागत हक बहाल

दस्तक पहाड न्यूज ऊखीमठ/ केदारनाथ। । पंच पंडा समिति रुद्रपुर को अपने परंपरागत हक-हकूकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण न्यायिक मामले में बड़ी सफलता मिली है। सिविल जज जूनियर डिवीजन ऊखीमठ ने 25 मई 2025 को दिए आदेश में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी को निर्देशित किया है कि रुद्रपुर के तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ धाम एवं उसके सहयोगी मंदिरों के गर्भगृह में अपने यजमानों के अभिषेक, संकल्प, परिक्रमा और रुद्री पाठ कराने से नहीं रोका जाएगा।न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों से भेंट, दक्षिणा और उपहार प्राप्त कर सकेंगे। इस फैसले के बाद केदारनाथ धाम और उससे जुड़े सहयोगी मंदिरों की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

यह मामला वर्ष 2023 से न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें पंच पंडा समिति रुद्रपुर के अध्यक्ष अमित शुक्ला वादी तथा श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी प्रतिवादी थे।मामले की सुनवाई के दौरान पंच पंडा समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील भट्ट, अधिवक्ता आनंद बजवाल और अधिवक्ता हार्दिक रावत ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष समिति के पास सुरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेज, ब्रिटिश कालीन अभिलेख तथा स्वतंत्र भारत के विभिन्न न्यायालयों के आदेश प्रस्तुत किए, जिनमें पंच पंडा समिति के पारंपरिक अधिकारों का उल्लेख किया गया था।निर्णय के बाद पंच पंडा समिति के अध्यक्ष अमित शुक्ला ने इसे “परंपरागत अधिकारों और धार्मिक परंपराओं की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से रुद्रपुर के तीर्थ पुरोहितों को उनकी पुरानी परंपरागत श्रेष्ठता और अधिकार पुनः प्राप्त हुए हैं।

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मंगलवार, 21 जुलाई 2026

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सफलता अंतिम नहीं है, और असफलता घातक नहीं है; बल्कि मायने यह रखता है कि आप निरंतर आगे बढ़ने का साहस रखते हैं या नहीं। हर ठोकर आपको मजबूत बनाने आती है, न कि गिराने।

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