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Dastak Pahad Team

सिल्ला बामण गांव के तीली-जाख-जाबर तोक में भूस्खलन से दहशत, कई आवासीय भवनों में पड़ी बड़ी दरारें

दस्तक पहाड़ न्यूज अगस्त्यमुनि। विकासखंड अगस्त्यमुनि के ग्राम पंचायत सिल्ला बामण गांव के तीली-जाख-जाबर तोक में लगातार हो रहे भूस्खलन से ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। भूस्खलन के कारण कई आवासीय भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, जबकि कुछ मकानों के फर्श भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों ने भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका जताते हुए शासन-प्रशासन से शीघ्र सुरक्षात्मक कार्य अथवा प्रभावित परिवारों के सुरक्षित विस्थापन की मांग की है।लगातार हो रहे भू-धंसाव और भूस्खलन से क्षेत्र में निवास करने वाले त्रिलोक लाल पुत्र श्याम लाल, जय लाल पुत्र श्याम लाल, अजय कुमार पुत्र आशा लाल, अमर लाल, अनीता देवी, राजेंद्र लाल, अनूप लाल पुत्र कुंदी लाल, लक्ष्मण सिंह पुत्र लाल सिंह, राजेंद्र सिंह रावत, मदन लाल, जगदीश लाल, सुनील कुमार, अनिल कुमार, चमन लाल, शिशुपाल लाल, सुनीता देवी और अनुसूया लाल, विरेन्द्र शाह सहित कई ग्रामीणों के आवासीय भवन प्रभावित हुए हैं। मकानों की दीवारों और फर्श में दरारें आने से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2013 में केदारघाटी में आई दैवीय आपदा के दौरान मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से तीली-जाख-जाबर तोक के निचले हिस्से का बड़ा भू-भाग बह गया था। इसके बाद से क्षेत्र की भूमि लगातार संवेदनशील बनी हुई है। आपदा को करीब 13 वर्ष बीतने के बावजूद प्रभावित क्षेत्र में स्थायी सुरक्षात्मक कार्य नहीं हो पाए हैं।ग्राम प्रधान सिल्ला बामण गांव श्रीमती लता चन्द की ओर से मामले को लेकर क्षेत्रीय राजस्व उपनिरीक्षक से प्रभावित तोकों एवं क्षतिग्रस्त भवनों का मौका-मुआयना भी कराया गया। निरीक्षण के बाद कुछ प्रभावित परिवारों को ₹6,500 की सहायता राशि प्रदान की गई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए अभी तक कोई प्रभावी सुरक्षात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तीली-जाख-जाबर तोक में निवास कर रहे परिवारों के क्षतिग्रस्त भवनों और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का शीघ्र विस्तृत भूगर्भीय एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए। साथ ही खतरे की जद में आए परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य कराए जाएं।उन्होंने कहा कि यदि प्रभावित क्षेत्र में स्थायी सुरक्षात्मक कार्य संभव नहीं हैं तो गंभीर रूप से प्रभावित एवं खतरे की जद में आए परिवारों के सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि या बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।

ग्रामीणों की प्रमुख मांग: प्रभावित क्षेत्र का तत्काल तकनीकी सर्वेक्षण कर भूस्खलन रोकने के लिए सुरक्षा दीवार, भू-कटाव रोकने सहित आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य किए जाएं तथा अत्यधिक जोखिम वाले आवासीय भवनों का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं विस्थापन के संबंध में उचित कार्रवाई की जाए।

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शनिवार, 24 अक्तूबर 2026

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