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करोड़ों की योजनाएं बनाने वाले अगस्त्यमुनि में सिंचाई खंड केदारनाथ के पास अपने बरामदे की सफाई के लिए पैसे नहीं !

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। करोड़ों रुपये की सिंचाई योजनाओं को तैयार करने और धरातल पर उतारने वाला सिंचाई विभाग अपने ही कार्यालय के बरामदे और रास्ते की सफाई व्यवस्था को लेकर उदासीन नजर आ रहा है। अगस्त्यमुनि नगर क्षेत्र की बैंक कॉलोनी में स्थित सिंचाई खंड केदारनाथ के कार्यालय की तस्वीरें सरकारी कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि हर बरसात के दौरान सिंचाई खंड केदारनाथ, अगस्त्यमुनि के कार्यालय परिसर और यहां आने-जाने वाली सीढ़ियों पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो जाता है। बारिश थमने के बाद भी यह मलबा लंबे समय तक वहीं पड़ा रहता है। स्थिति यह है कि मलबे के ऊपर ईंट-पत्थर रखकर विभागीय कर्मचारी, अधिकारी और आमजन आवाजाही करने को मजबूर हैं। कार्यालय में प्रतिदिन विभागीय कार्यों से जुड़े कर्मचारी-अधिकारी, ठेकेदार और आम लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा स्कूली छात्रों सहित अन्य लोगों की भी इस रास्ते से आवाजाही होती है। मलबे और असमतल रास्ते के बीच ईंट-पत्थर रखकर बनाया गया अस्थायी रास्ता कभी भी परेशानी या दुर्घटना का कारण बन सकता है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस विभाग के माध्यम से लाखों-करोड़ों रुपये की योजनाओं का निर्माण और रखरखाव किया जाता है, उसके लिए अपने कार्यालय के बरामदे और सीढ़ियों की सफाई करवाना कोई बड़ा काम नहीं होना चाहिए। कुछ सौ रुपये खर्च कर मलबा हटाया जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद लंबे समय तक स्थिति जस की तस बनी रहना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

यह मामला भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन सरकारी विभागों की कार्यशैली का एक बड़ा सवाल जरूर सामने लाता है। जिस विभाग में लाखों-करोड़ों रुपये की योजनाएं बनाई और संचालित की जाती हैं, वह अपने ही कार्यालय के बरामदे और रास्ते की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं कर पा रहा है।

विभागीय कार्यालय से गुजरने वाले रास्ते पर रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, आम नागरिक और विभागीय कार्यों से जुड़े लोग आते-जाते हैं। ऐसे में मलबे को लंबे समय तक पड़े रहने देना व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से कार्यालय परिसर और सीढ़ियों पर जमा मलबे को तत्काल हटाने तथा नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

सवाल यही है कि करोड़ों की योजनाएं बनाने वाला विभाग अपने ही कार्यालय के बरामदे की सफाई के लिए आखिर कब जागेगा?

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