दस्तक पहाड न्यूज चोपता।। पंचकेदारों में तृतीय केदार और विश्व के सबसे ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध शिव धाम भगवान श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार, 6 नवम्बर को शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के साथ ही वर्ष 2026 की तुंगनाथ धाम की ग्रीष्मकालीन यात्रा का समापन हो गया।
कपाट बंद होने के पावन अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच कपाट बंद करने की प्रक्रिया संपन्न हुई। मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच भक्तिमय माहौल बना रहा।
तीन पड़ावों से होकर मक्कूमठ पहुंचेगी उत्सव डोली
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली का पहला रात्रि प्रवास चोपता में होगा। 7 नवम्बर को डोली भनकुण्ड पहुंचेगी, जबकि 8 नवम्बर को भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान होगी।इसके बाद शीतकाल के दौरान भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न होगी। श्रद्धालु शीतकाल में यहीं पहुंचकर बाबा के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
3,680 मीटर की ऊंचाई पर विराजते हैं बाबा तुंगनाथ
समुद्रतल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर चोपता क्षेत्र में स्थित तुंगनाथ धाम का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजे जाने वाले भगवान तुंगनाथ के मंदिर में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। अपनी भौगोलिक ऊंचाई और धार्मिक महत्ता के कारण यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।कपाट बंद होने के साथ ही अब बाबा तुंगनाथ की शीतकालीन पूजा मक्कूमठ में होगी और श्रद्धालु शीतकाल में भी बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
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