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अगस्त्यमुनि महिला रामलीला की चतुर्थ रात्रि: सीता विदाई एवं राम वन गमन लीला से नम हुईं आँखें

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। अगस्त्य ऋषि की पावन तपस्थली अगस्त्यमुनि में हिमालयन वीरांगना संस्था द्वारा आयोजित महिला रामलीला की चतुर्थ रात्रि अत्यंत भावपूर्ण रही। इस दिन सीता विदाई एवं राम वन गमन लीला का मार्मिक मंचन किया गया, जिसे देखकर दर्शकों की आँखें नम हो गईं। मुख्य अतिथि श्रीमती विमला देवी (जिपंस वार्ड सिल्ला), कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह बुडेरा, अति विशिष्ट अतिथि सावन नेगी (पूर्व क्षेपंस, सिल्ला), विशिष्ट अतिथि राकेश नौटियाल, राधेलाल एवं महिला मंगल दल अध्यक्ष सिल्ला श्रीमती संजू रावत ने दीप प्रज्वलन एवं श्रीराम आरती कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती विमला देवी ने कहा कि महिलाओं द्वारा रामलीला का मंचन देखना गर्व की बात है। ये हमारी बेटियां संस्कृति को जीवित रख रही हैं। नारी शक्ति का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता। कार्यक्रम अध्यक्ष वीर सिंह बुडेरा ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयन वीरांगना संस्था का यह प्रयास सराहनीय है। राम वन गमन का प्रसंग हमें मर्यादा और त्याग सिखाता है। आज की पीढ़ी को इससे सीख लेनी चाहिए। अति विशिष्ट अतिथि सावन नेगी ने कहा कि रामलीला हमारी लोक संस्कृति की आत्मा है। महिलाओं का इसमें आगे आना समाज के लिए शुभ संकेत है।

चतुर्थ दिवस की लीला का प्रारम्भ अयोध्या से बारात के लौटने के प्रसंग से हुआ। इसके बाद कैकेयी-मन्थरा संवाद, दशरथ-कैकेयी संवाद और राजा दशरथ द्वारा राम को 14 वर्ष का वनवास व भरत को राजगद्दी देने के वरदान की घटना का मंचन किया गया। पिता के वचन को निभाने के लिए श्रीराम का वन गमन, माता कौशल्या का विलाप और सीता व लक्ष्मण द्वारा भी राम के साथ वन जाने का हठ, इन दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। अंतिम प्रसंग में सीता की विदाई का मार्मिक दृश्य दिखाया गया, जिसे देखकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा। सभी पात्रों का अभिनय महिलाओं एवं बालिकाओं द्वारा इतने दमदार और भावपूर्ण तरीके से किया गया कि दर्शकों की आँखें भर आईं। राम के चरित्र में मर्यादा, सीता के चरित्र में त्याग और लक्ष्मण के चरित्र में सेवा भाव को कलाकारों ने जीवंत कर दिया। वशिष्ठ का अभिनय सतेश्वरी रौथाण, सुमन्त का रामेश्वरी बुटोला, दशरथ का अनीता राणा, कौशल्या का सुशीला सकलानी, कैकई का सरिता भट्ट, सुमित्रा का अनीता रावत, मंथरा का ललिता रौतेला ने निभाया। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि महिला रामलीला का उद्देश्य नारी शक्ति को मंच प्रदान करना और आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पहुंच रहे हैं।

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शुक्रवार, 12 जून 2026

आज का सुविचार

सच्चा ज्ञान केवल किताबों में नहीं, बल्कि अनुभव और आत्म-चिंतन में छिपा है। दूसरों की गलतियों से सीखें, अपनी गलतियों को स्वीकारें और निरंतर सुधार की प्रक्रिया में बने रहें, यही बुद्धिमानी है।

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