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पलायन की चुनौती के बीच अपनी जड़ों की ओर लौटने की पहल, त्यूंग गाँव में होगा “मेरा गाँव, मेरा तीर्थ” कार्यक्रम

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ते पलायन के कारण जहाँ अनेक गाँव सूने होते जा रहे हैं, वहीं अगस्त्यमुनि विकासखंड का त्यूंग गाँव अपनी जड़ों से जुड़ने और गाँव को फिर से जीवंत बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल कर रहा है। इसी उद्देश्य के साथ गाँव में 12 जून से 14 जून तक “मेरा गाँव, मेरा तीर्थ” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।कार्यक्रम के आयोजक गंगाराम सकलानी, भगवती सेमवाल, विशम्भर सेमवाल, विनय सेमवाल और नागेन्द्र सकलानी ने बताया कि आज पहाड़ का सबसे बड़ा संकट पलायन है। रोजगार और शिक्षा की तलाश में बड़ी संख्या में लोग गाँवों से दूर चले गए हैं, जिससे कई गाँवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ती जा रही है। ऐसे समय में यह आयोजन गाँव और प्रवासियों के बीच रिश्तों को मजबूत करने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है।उन्होंने कहा कि “मेरा गाँव, मेरा तीर्थ” का उद्देश्य केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि गाँव के विकास, संरक्षण और भविष्य की दिशा पर सामूहिक चिंतन करना है। कार्यक्रम में गाँव के वर्तमान और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी तथा ग्रामीणों और प्रवासियों के सुझावों को साझा किया जाएगा।

आयोजन में बड़ी संख्या में वे लोग भी शामिल हो रहे हैं जो वर्षों से रोजगार और अन्य कारणों से गाँव से बाहर रह रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि जब लोग अपने गाँवों से भावनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे, तभी पलायन के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकेगा और गाँवों के विकास में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं आयोजन समिति के प्रयासों से रिन्यू पावर द्वारा निर्मित 25 हजार लीटर क्षमता के पेयजल टैंक का शुभारम्भ भी पहले दिन किया जाएगा। यह सुविधा गाँव के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।इसके अलावा समिति द्वारा गाँव की अमूल्य धरोहर माने जाने वाले तीन बुजुर्ग महिलाओं और तीन बुजुर्ग पुरुषों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर 14 जून को धियाणी पूजन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी सुन्दर सिंह भण्डारी होंगे।

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साथ ही गाँव के ग्राम देवताओं का सामूहिक पूजन भी होगा, जिसमें ग्रामीण और प्रवासीजन एक साथ सहभागिता करेंगे। त्यूंग गाँव की यह पहल ऐसे समय में उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रही है, जब पहाड़ के अनेक गाँव आबादी घटने की चुनौती से जूझ रहे हैं। “मेरा गाँव, मेरा तीर्थ” जैसे आयोजन यह संदेश दे रहे हैं कि यदि समाज मिलकर प्रयास करे तो अपनी संस्कृति, परंपराओं और गाँवों को जीवंत बनाए रखा जा सकता है।

दस्तक पहाड़ न्यूज़।

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