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Dastak Pahad Team

चिरबटीया में किसान मेला एवं प्रदर्शनी में उमड़ी किसानों की भीड़, प्रगतिशील कृषकों को किया सम्मानित

दस्तक पहाड न्यूज अगस्त्यमुनि।। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार, पौड़ी गढ़वाल की ओर से पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबटिया, रुद्रप्रयाग में दो दिवसीय किसान मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मेले में जनपद के विभिन्न गांवों से पहुंचे कृषकों एवं किसान समूहों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों एवं कृषक समूहों को सम्मानित किया गया। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, उद्यानिकी एवं स्वरोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की गई।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष रितु नेगी ने कहा कि भरसार विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मंच पर किसान, कृषि वैज्ञानिक, शासन-प्रशासन से जुड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक साथ उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि जब सभी लोग एक मंच पर बैठकर किसानों की समस्याओं, जरूरतों और उनके हितों पर चर्चा करते हैं, तो निश्चित रूप से इसका लाभ धरातल पर दिखाई देता है। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और कृषि के क्षेत्र में उपलब्ध नई संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अति विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्य कण्डाली निर्मला बहुगुणा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी का प्रमुख आधार कृषि एवं बागवानी है। यहां के किसानों को जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, सिंचाई, विपणन और उचित मूल्य जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह मेला किसानों को नई तकनीकों और वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

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विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर महावीर नेगी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि एवं उद्यानिकी को विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वय करना होगा। कृषि विश्वविद्यालयों और किसानों के बीच निरंतर संवाद से ही शोध का लाभ खेतों तक पहुंचाया जा सकता है।

इस अवसर पर प्रगतिशील किसान संतोषी नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों में मेहनत करने की क्षमता और कृषि का पारंपरिक ज्ञान मौजूद है। यदि उन्हें समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, गुणवत्तायुक्त पौध और उत्पादों के विपणन की सुविधा मिले तो वे कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में बेहतर परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान मेलों से किसानों को नई जानकारियां प्राप्त होती हैं और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर भी मिलता है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना भी हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय संसाधनों पर आधारित कृषि, उद्यानिकी, फल उत्पादन, सब्जी उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है। किसान मेला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने और नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

दो दिवसीय मेले में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों की ओर से कृषि और उद्यानिकी से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, फल एवं सब्जी उत्पादन, पौध संरक्षण तथा आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान सुझाया।कार्यक्रम का संचालन कालिका काण्डपाल एवं डॉ लक्ष्मी रावत द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, कृषकों एवं किसान समूहों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के प्रयास जारी रहेंगे।

सोमवार, 02 नवंबर 2026

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