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Dastak Pahad Team

14 नवंबर से सजेगा ऐतिहासिक गौचर मेला, नए लोगो में दिखेगी देवभूमि की लोकसंस्कृति और धार्मिक विरासत

74वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का सात दिवसीय आयोजन 20 नवंबर तक, नए लोगो और शुभंकर से मिलेगी मेले को नई पहचान; औद्योगिक विकास, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा मंच


दस्तक पहाड न्यूज गौचर (चमोली)।। उत्तराखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत का प्रतीक गौचर मेला एक बार फिर अपनी भव्यता के साथ सजने जा रहा है। चमोली जनपद के गौचर में 14 नवंबर से 74वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक गौचर मेले का आगाज होगा। सात दिनों तक चलने वाला यह मेला 20 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। मेले को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार मेले को नई पहचान देने के उद्देश्य से आकर्षक लोगो और शुभंकर तैयार किया गया है, जिसका अनावरण जिलाधिकारी गौरव कुमार सहित अन्य अतिथियों ने किया।

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नए लोगो में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य को एक साथ उकेरने का प्रयास किया गया है। इसमें रणसिंगा के स्वरूप में अंकित ‘गौचर’ शब्द पहाड़ की मंगल ध्वनि और सांस्कृतिक ऊर्जा को दर्शाता है। भगवान बदरी विशाल का ध्वज और छत्र धार्मिक आस्था एवं आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक के रूप में शामिल किए गए हैं। वहीं मां नंदा देवी राजजात यात्रा, डोली, छत्र, ढोल-दमाऊ और मशकबीन बजाते लोक कलाकारों के चित्रण के माध्यम से उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया गया है। पर्वतीय चोटियों, वन्यजीवों, चक्र और पारंपरिक वाद्य यंत्रों को भी लोगो में स्थान दिया गया है।

गौचर मेले का इतिहास भी इसे विशिष्ट बनाता है। मेले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू और विजयलक्ष्मी पंडित की गौचर यात्रा के बाद इस क्षेत्र को नई पहचान मिली थी। वर्ष 1943 में पहली बार मेले का औपचारिक आयोजन किया गया। शुरुआत में यह मेला भोटिया समुदाय और स्थानीय व्यापारियों के बीच ऊन, जड़ी-बूटियों तथा हस्तशिल्प के कारोबार का प्रमुख केंद्र रहा। धीरे-धीरे यह आयोजन गढ़वाल की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण मंच बन गया।

इस बार मेले में व्यापारिक गतिविधियों को भी व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है। अमर उजाला की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मेले में 268 दुकानें और 138 स्टॉल लगाए जाने की तैयारी है। दुकानों और स्टॉलों के लिए ऑनलाइन आवेदन भी आमंत्रित किए गए थे। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे, पुलिस सहायता केंद्र, पार्किंग, पेयजल, विद्युत और कूड़ा निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की तैयारी की गई है।

जिला प्रशासन की ओर से इस बार मेला मैदान का नया लेआउट, आकर्षक मंच, बेहतर लाइट एवं साउंड व्यवस्था, मिनी मेला मार्केट, सेल्फी प्वाइंट और स्मृति चिह्नों की व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय उद्यमिता, हस्तशिल्प, महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों, औद्योगिक एवं विकास प्रदर्शनी और खेलकूद गतिविधियों को विशेष महत्व दिया जाएगा। बच्चों के लिए सुरक्षित गतिविधियां और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।मेले के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। मुख्य बाजार और पार्किंग स्थलों पर यातायात नियंत्रण, अस्थायी मेला पुलिस चौकी, पुलिस एवं अग्निशमन कर्मियों की तैनाती के साथ ही मेले को नशामुक्त रखने के लिए निगरानी की जाएगी। निर्बाध पेयजल और विद्युत आपूर्ति, अतिरिक्त वाटर टैंकर, सफाई व्यवस्था तथा मोबाइल शौचालयों की सुविधा भी सुनिश्चित करने की योजना है। इस बार मेले के प्रचार-प्रसार के लिए नई वेबसाइट तैयार की गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी इस सांस्कृतिक आयोजन से जुड़ सकेंगे।जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष संदीप नेगी, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, परियोजना निदेशक आनंद सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और मेले से जुड़े हितधारक मौजूद रहे। गौचर मेला केवल मनोरंजन और खरीदारी का आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की लोकपरंपराओं, व्यापारिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। ऐसे में इस बार नए लोगो और नई व्यवस्थाओं के साथ आयोजित होने वाला 74वां गौचर मेला स्थानीय लोगों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और प्रवासियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।

 

गुरुवार, 05 नवंबर 2026

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